पैकेजिंग और डिलीवरी
पैकेजिंग विवरण: 1 सेट/मेल बॉक्स कार्टन
समय सीमा:
| मात्रा | 1 - 2 | >500 पीसी |
| अनुमानित समय (दिनों में) | 7-10 दिन | 15-35 दिन |
गोल नेट का परिचय
19वीं सदी के अंत में, इंग्लैंड में एक फुटबॉल मैच हो रहा था। हमलावर टीम ने तेज़ी से आगे बढ़कर शॉट लगाया, तो खिलाड़ी खुशी से झूम उठे और रेफरी ने गोल को वैध घोषित कर दिया। लेकिन बचाव पक्ष के खिलाड़ियों ने रेफरी को घेर लिया और चिल्लाने लगे कि गेंद गोलपोस्ट से बाहर चली गई है और इसे गोल नहीं माना जाना चाहिए। क्या गेंद गोलपोस्ट के अंदर गई थी? दरअसल, उस समय फुटबॉल मैचों में गोल के पीछे कोई नेट नहीं होता था और गोल शॉट से ही होता था। गेंद आमतौर पर तेज़ गति से जाती है, इसलिए यह तय करना मुश्किल होता है कि वह गोल में गई है या नहीं। जब दोनों पक्षों के खिलाड़ी बहस कर रहे थे और रेफरी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा था, तभी बाओ एरजी नाम का एक मछली पकड़ने के उपकरण बनाने वाले कारखाने का मालिक मैदान में दौड़ा आया। उसने अपने हाथों में मछली पकड़ने का जाल पकड़ा हुआ था। इस तरह, किक मारी गई गेंद जाल में फंस जाएगी और गोल हुआ है या नहीं, इस पर कोई विवाद नहीं होगा। उसके सुझाव को खिलाड़ियों और रेफरी ने स्वीकार कर लिया और दोनों टीमों ने तुरंत अपने जाल टांग दिए और खेल जारी रखा। इस तरह, दर्शक भी देख सकते थे कि गोल हुआ है या नहीं। यह विधि फुटबॉल मैचों में गोल हुआ है या नहीं, इसका निर्णय करने में आने वाली एक बड़ी समस्या का समाधान करती है। 1891 में, इंग्लिश फुटबॉल फेडरेशन ने आधिकारिक तौर पर गोलपोस्ट लटकाने की विधि को मंजूरी दी थी, और यह आज भी उपयोग में है।
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